मानसिकता को हम और भी विभिन्न रूप से भी है किन्तु मानसिकता एक विकार या बीमारी की उत्पति का एक मूल प्रकार है ,जो की ''एक मनुष्य के अंदर मन को झकझोर कर रख देता है ;यह विविन्न प्रकार की तो नहीं है ;''किन्तु मानसिकता को उत्पन्न तो कोई नहीं करता है। किन्तु एक नजरिये से देखा जाये तो हम एक परिकल्पना तो नहीं कर सकते हे किन्तु एक मनुष्य के भीतर बहुत से प्रकार के ऐसे कुछ विकार होते है जिन्हें हम शाररिक विकार का नाम दे सकते है। किन्तु मानसिकता जो की एक प्रभाव कारी विकार है ,यह किसी डॉक्टर के पास जाने या किसी वैध या नीम हकीमो के पास जाकर ईलाज (उपचार )या झाड़ -फूंक कारवाने से समाप्त नहीं होता है यह तो केवल एक विकार है या नहीं यह तो कह पानाउचित नहीं होगा ''''आज समाज किया जो पिछड़ी सोच के लोग आज भी इस आधुनिक
संसार में भी अपना सिक्का (अधिपत्य )जमाना चाहते है। ⟳⟳⟳⟳
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